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फाइन आर्ट में दें अपने करियर को शेप

June 14, 2019

Fine Art, यानि सूक्ष्म कला का क्षेत्र , एक ऐसा विषय है, जो मौलिक तौर पे हमेशा संसार में बिना किसी के पढाये, सिखाये भी अस्तित्व में रहा है,और जिसको नर्सरी की शिक्षा से लेकर प्रारम्भिक और माध्यमिक शिक्षा में अनिवार्य तौर पे हमने स्कूलों में भी रखा हुआ है| ड्राइंग पेंटिंग बनाना रंगों के साथ खेलना मानव प्रकृति का हिस्सा है| हाँ, ये अलग बात है कि कुछ लोग जन्म से इसमे बेहद प्रतिभावान होते हैं| और कुछ विधिवत इसकी पढ़ाई और अभ्यास कर इसे सीखकर दक्ष होते हैं| ये तो हुई बात उनकी जो पेंटर आदि रहके जीवन में सिर्फ पेंटिंग और चित्रकारी के उस्ताद बनते हैं, बहुत नाम और पैसा भी कमाते हैं, या फिर वे लोग जो अपनी चित्रकारी और कला के हुनर को व्यावसायिक तौर पे इस्तेमाल करके आजीविका अर्जन करते हैं (होर्डिंग्स,signboard, कैलेंडर, आदि चीजें निर्मित कर | मगर फाइन आर्ट्स का यह क्षेत्र आगे चलकर एप्लाइड आर्ट्स की श्रेणी में पहुंच जाता है, और जैसा कि नाम से जाहिर है अब कला को अन्य क्षेत्रों में लागू और इस्तेमाल करने का खेल शुरू होता है| और साथ ही शुरू होती है अलग अलग क्षेत्रों के जरूरत के मुताबिक़ अलग-अलग तरह की शिक्षा और यहीं से शुरू होता है डिजाईन शब्द का जो विस्तृत रूप से हम आगे पढेंगे और समझेंगे|

एप्लाइड आर्ट

चित्रकारी, मूर्तिकला, जरिये विजुअल आर्ट को जब हम विभिन्न क्षेत्रों में लागू करतें हैं तो वो एप्लाइड आर्ट के क्षेत्र के अंतर्गत आने लगता है, और मोटे तौर पर चार ऐसे परिभाग हैं जिनमे इसको देखा जा सकता है| ये है- इंडस्ट्रियल डिजाईन, ग्राफिक डिजाईन, इंटीरियर डिजाईन और फैशन डिजाईन| इनको विस्तार से एक एक कर समझने से पूर्व हमें यह ध्यान में रखना चाहिए कि Fine Arts की पढ़ाई में जाने वाले छात्रों को ही एप्लाइड आर्ट की शिक्षा में मोड़ा जा सकता है, क्योंकि Fine Arts में दक्ष होना इसकी पहली अनिवार्यता है| इसका अर्थ यह हुआ कि फाइन आर्ट्स के Sketching, Drawing, Painting, Graphic Print making, Colouring, Sculpture तथा History of Art आदि विषयों से गुजरकर ही एप्लाइड आर्ट्स के कोर्स में आगे बढ़ा जा सकता है| एप्लाइड आर्ट्स , जिसे हम कमर्शियल आर्ट भी कह सकते हैं, इसके अंतर्गत कई तरह की उपशाखाओं का विकल्प रहता है, और इसके तहत Visualization, Photography, Illustration, Digital Publication, Typography, तथा Exhibition Design सरीखे कई प्रकार के चुनाव हमारे समक्ष रहते हैं| पहले के जमाने में रचनात्मक विचार पेंसिल और रंगों आदि के जरिये सिर्फ कागज पर ही पहले व्यक्त  होते थे, मगर अब इन्हें कंप्यूटर तथा टेक्नोलॉजी के सहारे भी पैदा किया और अंतिम रूप दिया जाता है|फाइन आर्ट्स तथा एप्लाइड आर्ट्स की ट्रेंनिंग और शिक्षा के लिए कुछ प्रख्यात इंस्टिट्यूट हैं|

इन तमाम संस्थानों में दाखिले हेतु बारहवीं पास होना अनिवार्य है, तथा ड्राइंग पेंटिंग मौलिक हूनर का होना / इसको जाचने परखने हेतु कई संस्थान अपना प्रारम्भिक टेस्ट भी करते हैं| विस्तृत जानकारी के लिए सम्बंधित इंस्टिट्यूट की वेबसाइट पर जाना श्रेयस्कर होगा|

डिजाईन आधारित क्षेत्र और इंडस्ट्री;

 जैसे कि हमने आपको उपर भी बताया है कि एप्लाइड आर्ट का उपयोग मुख्य रूप से चार डिजाईन आधारित इंडस्ट्रीज में होता है|और उन्ही के आधार पर चार प्रमुख डिजाईन के कोर्स और करियर का निर्माण छात्रों के लिए होता है| डिजाईन के ये चार क्षेत्र विस्तृत रूप से इस प्रकार है|

इंडस्ट्रियल डिजाईन

इसे आप प्रोडक्टडिजाईन भी कह सकते हैं इसके अंतर्गत किचन के सामान से लेके, मोबाइल फ़ोन, ऑटोमोबाइल, मेडिकल इक्विपमेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक गुड्स आदि रोजमर्रा में काम आने वाली हर चीज शामिल है, जो कि आपके घर ऑफिस, मनोरंजन के स्थानों या बाहर कहीं भी, किसी भी संस्थान में इस्तमाल होती है| इसके अंतर्गत बच्चो के खिलौने, बिजली के सामान, आदि हर प्रकार के चीजों का डिजाईन तैयार करने का कोर्स होता है, जो कि तीन से पांच वर्ष का रहता है| इसके तहत छात्र को डिजाईनके हूनर के अलावा ट्रेंड को समझना,टेक्नोलॉजी का इस्तमाल, उपयोग में लाने वाली सामग्री का आकलन और उत्पादन मूल्य आदि कई आयामों को सीखना पड़ता है| प्रोडक्ट डिजाईन के नाम से चार साल के ग्रेजुएट कोर्स हेतु कुछ प्रमुख संस्थान हैं:

National Institute of Design, Ahmdabad

Symbiosis Institute of Design, Pune

Pearl Academy, Noida, Mumbai

Sushant School of Design, Gurgaon

ISDI Parsons, Mumbai

DSK International

इन तमाम संस्थानों में एंट्रेंस टेस्ट के जरिये दाखिला होता है| विस्तृत जानकारी इनके वेबसाइट से प्राप्त करें| यहां पढाये जाने वाले कोर्स के अंतर्गत जो प्रमुख विषय आते हैं, वे हैं Ergonomics, Design Process, Strength Of Materials, System Design, Technocogyes & Structures, Sustainable Design, Knowledge of Manufacturing etc.

इस कोर्स को करने के पश्चात विद्यार्थी के लिए रोजगार के लिए भारी अवसर खुल जाते हैं| जो कंपनियां घरेलु उत्पादों के क्षेत्रों में हैं, उनके अलावा Water Treatment. Thermal Managment, Building Technology से जुड़े उद्योगों में भी इनकी मांग रहती है| ये लोग Design Studiosमें, या अपनी खुद की  Consultancy खोलकर भी कार्य कर सकते हैं| ट्रांसपोर्टेशन तथा ऑटोमोबाइल उद्योग में इनकी भारी मांग है|

इसे हम कम्युनिकेशन डिजाईन के विस्तृत स्वरुप में भी देख सकते हैं| इसके तहत ग्राफिक्स ,टेक्स्ट तथा विजुअल्स का इस्तमाल अपने विचार को स्वरुप देने में , ब्रांड के निर्माण तथा प्रोडक्ट को प्रमोट करने में किया जाता है| डिजाइनिंग के हुनर के अलावा भी एक कम्युनिकेशन डिजाईन के अन्दर बेहतरीन दिमाग होना चाहिए, जो न सिर्फ एक आखों को सुहाने वाले लोगों की सरचना कर सके बल्कि जिसका इस्तमाल Merchandise, Social Media तथा अन्य प्लेटफार्म पर भी आसानी से हो सके| ये एक सहभागी कार्य क्षेत्र है, जिसमे काम करने वालो को मार्केटिंग, कंटेंट डेवलपर आदि अन्य लोगों के साथ भी नजदीकी सहयोग से बढ़ना पड़ता है| भारतवर्ष में ग्राफिक और कम्युनिकेशन डिजाईन की पढ़ाई के लिए कुछ प्रमुख इंस्टिट्यूट और प्रोग्राम ये हैं:

National Institute of Design, Ahmadabad- Graduate Diploma Programme in Design (Graphic/Film & Video/Animation)

Symbiosis Institute of Design , Pune- B.Des Communication Design

Pearl Academy ,Delhi, Noida, Mumbai- BA(Hons) Communication Design

Sushant School  of Design, Gurgaon- B.Des (Visual communication)

MAEER’s MIT Institute of Design,Pune- Graduate Diploma (Graphic/film & Video Animation)

GD Goenka University’s SOFD Gurgaon- B.Sc/B.Des(Communication Design)

Srishti Institute of Art, Design and Technology,Banglore- Undergraduate Pro/ Diploma Pro

Apeejay Institute of Design,Delhi- B Des(Graphic Design/Animation & Multimidea

ISDI Parsons, Mumbai- Graduate Diploma- Comm. Design

इन संस्थानों में दाखिले के लिए बारहवीं पास होना जरूरी है, तथा दाखिला इनके अपने क्रिएटिव टेस्ट एवं इंटरव्यू के आधार पर होता है|

कम्युनिकेशन डिजाईन के अंतर्गत जो विषय पढाये जाते हैं वे इस प्रकार है-

Identity Design, Typography, Illustration, Drawing Data Visualization, Narrative & Storytelling, Information Design, Publication Design, Interaction Design, Web &App Design etc.

इस कोर्स को करने के पश्चात नौकरी और करियर के लिए छात्र डिजाईन स्टूडियो, आईटी सेक्टर, एडवरटाइजिंग सेक्टर, एनीमेशन स्टूडियो, मीडिया हाउस, इवेंट कम्पनीज, पब्लिकेशन हाउस आदि में भी नौकरी कर सकते हैं या खुद की प्राइवेट कंसल्टेंसी भी चल सकते हैं|

Interior Design

इसके तहत फर्नीचर डिजाईन भी समावेशित रहता है, क्योंकि घर हो या ऑफिस आदि कोई भी कार्य करने का स्टूडियो, या दुकान या स्थान उसके इंटीरियर यानि अन्दर की सजावट में फर्नीचर की अहम भूमिका रहती है| इंटीरियर डिजाईन की भूमिका अब सिर्फ घरों ऑफिसों में नहीं बल्कि बड़े-बड़े संस्थानों/उपक्रमों जैसे होटल एअरपोर्ट, हॉस्पिटल, रेस्टोरेंट, ऑडिटोरियम तथा EXHIBITION PLACEमें भी पड़ती जा रही है, और इसलिए इसका कोर्स किये विशेषज्ञों के वास्ते अच्छी नौकरियां और करियर की असीम संभावनाएं हैं| एक अच्छा इंटीरियर डिज़ाइनर होने के लिए आप में उन तमाम आयामों की अच्छी समझ होनी चाहिए जो सिर्फ कला, रंगों और परिवेश के अलावा भी किसी स्पेस का रहने योग्य तथा कार्य उपयोगी बनाते हैं| ये सिर्फ डेकोरेशन यानि सजावट का ही विषय नहीं है| इसमें काम करते समय बजट के साथ उपयोग में लाइ जा रही सामग्रियों की भी अच्छी पहचान और परख होनी चाहिए| जहां से आर्किटेक्ट छोड़ता है, वहां से आगे इंटीरियर डिजाईन उसे पकड़ कर आगे बढ़ता है – तथा सुरक्षा,आखों अच्छा लगने और आराम के पहलू को ध्यान में रखते हुए फर्नीचर फर्निशिंग, लाइटिंग, आदि की व्यवस्था और निर्धारण करता है| इंटीरियर डिजाईन का कोर्स जो तीन से पांच साल तक का रहता है, उसके वास्ते कुछ प्रमुख संस्थान ये हैं:

CEPT, Ahmadabad- Bachelor in Interior Design (5 years)

National Institute of Design, Ahmadabad- Graduate, Diploma Design –Furniture & Interior

Pearl Academy (Delhi, Mumbai, Noida, Jaipur)-BA (Hons)  

Sushant School of Design, Gurgaon = B.Des.(Int. Design)

MAEER’s MIT Institute of Design,Pune- Graduate Diploma(Interior Space & Furniture Design)

Apeejay Institute of Design,Delhi- B Des (Interior Design)

ISDI Parsons, Mumbai- Graduate Diploma- Interior Design.

ये तमाम कोर्स भी बारहवीं के बाद किये जाते हैं, और इन्हें करके छात्र इंटीरियर डिज़ाइनर की मांग के मद्देनजर या तो Freelancer Basis पर या इनसे जुडी संस्थाओं में नौकरी कर अच्छा खासा पैसा कमाते हैं| बिल्डिंगों के निर्माण के साथ ही इंटीरियर डिज़ाइनर बिल्डरों तथा आर्किटेक्ट के साथ जुड़ के काम करने लगते हैं| फर्नीचर डिजाईन का काम फर्नीचर निर्माताओं के संग बारह महीने बड़े पैमाने पर इंडस्ट्री की तरह चलता है|

भारत की सबसे पुरानी मॉडर्न यूनिवर्सिटी कलकत्ता यूनिवर्सिटी
भारत की सबसे पुरानी आधुनिक यूनिवर्सिटी कलकत्ता यूनिवर्सिटी

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