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देश के सरकारी बैंकों में विलफुल डिफॉल्टर्स का 1.5 लाख करोड़ रूपये बकाया

July 2, 2019

भारत के सरकारी बैंकों ने 2018-19 में 1.5 लाख करोड़ रूपये लोन को “विलफुल डिफॉल्ट” के रूप में वर्गीकृत किया है| इनमे सबसे अधिक रकम स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का लगभग एक तिहाई हैं|

भारतीय कानून के तहत, विलफुल डिफॉल्टर्स को फर्म या व्यक्तियों के रूप में क्लासिफाइड किया जाता है जो बड़े बिज़नेस के मालिक हैं और जानबूझकर भुगतान से बचते हैं|

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रश्नों के लिखित उत्तर में मंगलवार को संसद में कहा कि भारतीय स्टेट बैंक का विलफुल डिफॉल्ट के तौर पर सबसे अधिक 46,158 करोड़ रूपये फसा हुआ है , जबकि दूसरे नंबर पर पंजाब नेशनल बैंक का 25,090 करोड़ रूपये और बैंक ऑफ़ इंडिया का 9,090 करोड़ रूपये फसा है| साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 31 मार्च, 2019 तक राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा 8,121 मामलों में वूसली के लिए मुकदमे दर्ज करवाए गए हैं। 

भारतीय रिजर्व बैंक के डाटानुसार, सरकारी बैंकों का 31 मार्च 2019 तक 63820 करोड़ रुपये का ग्रॉस लोन फंसा हुआ है। इस कारण से बैंकों का एनपीए भी कम नहीं हो रहा है। 2014-15 में विलफुल डिफॉल्टर की संख्या 5,349 थी, जो मार्च 2019 में बढ़कर 8,582 हो गई। इसमें निजी बैंकों का आंकड़ा शामिल नहीं है। 

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