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ILO Report:ग्लोबल वार्मिंग या “हीट स्ट्रेस” के कारण दुनिया भर में 8 करोड़ नौकरियां ख़त्म हो जाएंगी

July 5, 2019

काम करने के एफिशिएंसी पर काम करने का कंडीशन कितना प्रभाव डालता है इस सवाल का जवाब इंटरनेशनल लेबर ओर्गनइजेशन के रिपोर्ट से पता चलता है|रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल वार्मिंग या “हीट स्ट्रेस” के कारण भारत 2030 तक 34 मिलियन नौकरियों को खो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक गर्मी की वजह से काम के घंटों में 5.8फीसदी की कमी देखने को मिलेगी और जिसके चलते उत्पादकता में कमी आएगी। भारत के कृषि और निर्माण उद्योगों को सबसे मुश्किल गर्मी से होने की उम्मीद है।

अपनी “वर्किंग ऑन अ वार्मर प्लैनेट” रिपोर्ट में, ILO ने कहा कि 2030 तक- अगले दो दशकों में- पूरी दुनिया में उत्पादकता में 2% की कमी देखी जाएगी क्योंकि श्रमिकों के लिए तापमान बहुत गर्म होगा।इसका मतलब है कि दुनिया भर में 80 मिलियन नौकरियां ख़त्म हो जाएंगी।

अपनी रिपोर्ट में, ILO ने “हीट स्ट्रेस” या काम करने और बाहर के तापमान से शरीर की गर्मी में वृद्धि का विश्लेषण किया है। संगठन ने पाया कि गर्मी का तनाव जितना अधिक होगा, मनुष्य उतनी ही कम लेबर इंटेंसिव जॉब कर पाएंगे।

हीट स्ट्रेस के बढ़ते स्तर से अधिक आय असमानता और अधिक शहरी-ग्रामीण विभाजन भी पैदा होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक चीन को 5.47 मिलियन नौकरियों और उत्पादकता में 0.78% की कमी का अनुमान है, जबकि अमेरिका केवल 3.89 लाख नौकरियों या 0.21% उत्पादकता में कमी करेगा। चाड और सूडान जैसे अफ्रीकी देशों में क्रमशः काम के घंटों में 7.11% और 5.9% की कमी देखी जाएगी, जबकि थाईलैंड और कंबोडिया जैसे पूर्व एशियाई देशों में क्रमशः 6.39% और 7.83% की कमी देखी जाएगी।

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