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राष्ट्रपति के मंजूरी के साथ तीन तलाक बिल पर बना क़ानून,तुरंत तलाक देने पर तीन साल की सजा

August 1, 2019

तीन तलाक बिल को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तरफ से मंजूरी मिल गई है|जिसके साथ ही अब यह बिल अस्तित्व में आ गया है|
तीन तलाक बिल (Triple Talaq bill) संसद के दोनों सदनों से पहले ही पास हो चुका है| मोदी सरकार ने इस बिल को 25 जुलाई को लोकसभा में और 30 जुलाई को राज्यसभा में पास करवाया था|

यह क़ानून 19 सितम्बर 2018 से लागू माना जाएगा| इसके बाद जितने भी मामले में तीन तलाक से संबंधित आए हैं, उन सभी का निपटारा इसी कानून के तहत किया जाएगा|

तीन तलाक बिल में क्या हैं प्रावधान:

यदि कोई मुस्लिम पति अपनी पत्नी को मौखिक, लिखित या इलेक्ट्रानिक रूप से या किसी अन्य विधि से तीन तलाक देता है तो उसकी ऐसी कोई भी ‘उदघोषणा शून्य और अवैध होगी।

तुरंत तीन तलाक को संज्ञेय अपराध मानने का प्रावधान, यानी पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है|

पीड़ित महिला अपने पति से गुजारा भत्ते का दावा कर सकती है|और उन्हें भत्ते के रूप में कितने पैसे दिए जाय, इस रकम को मजिस्ट्रेट निर्धारित करेगा।

तीन तलाक देने वाले शख्स के लिए तीन साल तक की सजा का प्रावधान

यह संज्ञेय तभी होगा जब खुद महिला शिकायत करे या फिर उसका कोई सगा-संबंधी

अगर तीन तलाक देने वाला समझौता करना चाहता है, तो पहले इसके लिए पीड़िता की रजामंदी की जरूरत होगी।

जमानत के लिए आरोपी को मजिस्ट्रेट का दरवाजा खटखटाना होगा| जमानत तभी दी जाएगी, जब पीड़ित महिला का पक्ष सुना जाएगा

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