Latest News
Articles

MBBS और BDS के अलावां मेडिसिन में और भी हैं विकल्प डॉक्टर बनने के

September 24, 2019

मेडिसिन में करियर की बात आती है तो स्टूडेंट्ड MBBS और BDS कोर्सेज को सामने रखतें हैं| देश में मेडिकल कॉउंसिल से एप्रूव्ड 495 मेडिकल कॉलेज है जिसमे MBBS की 64000 सीट्स हैं| इन कोर्सेज के अलावां मेडिसिन में और भी अल्टरनेटिव फ़ील्ड्स हैं जो डॉक्टर बनने के रास्ते को खोलतें हैं| जिसमे कि आयुर्वेदा, सिद्धा, यूनानी तिब्ब, सोवा रिग्पा और होमियोपैथी शामिल है जिन्हे आयुष कोर्सेज भी कहतें हैं| MBBS और BDS के अलावां इन सभी कोर्सेज में एडमिशन के लिए भी NEET से होकर गुजरना होता है|

एनएमसी, सेंट्रल कॉउन्सिल ऑफ़ मेडिसिन और इंडियन मेडिसिन एक ब्रिज कोर्स अप्रूव कर सकती है जो उन्हें मॉडर्न मेडिसिन प्रेसक्राइब करने के योग्य बनाएगा|

आयुर्वेदा


इस फील्ड में साढ़े पाँच साल का बैचलर ऑफ़ आयुर्वेद मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) कोर्स ऑफर किया जाता है, जिसमें एक वर्ष का इंटर्नशिप भी सम्मिलित है।

कोर्स के अंतर्गत शरीररचना विज्ञान, शरीरक्रिया विज्ञान, चिकित्सा के सिद्धान्त, रोगों से बचाव तथा सामाजिक चिकित्सा, फर्माकोलोजी, विषविज्ञान(toxicology), फोरेंसिक चिकित्सा, कान-नाक-गले की चिकित्सा, आँख की चिकित्सा, शल्यक्रिया के सिद्धान्त आदि के बारे में पढ़ा जाता है|

कोर्स को पूरा करने के बाद स्टूडेंट्ड फिजिशियन और सर्जन के रूप में प्रैक्टिस कर सकतें हैं| और वे पोस्टग्रेडुएशन के रास्ते भी जा सकतें हैं|

प्रमुख इंस्टीटूट्स

राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंस, बैंगलोर
गुजरात आयुर्वेद यूनिवर्सिटी, जामनगर
जेबी रॉय राजकीय मेडिकल कॉलेज, कोलकाता
लखनऊ का राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज
श्री आयुर्वेद महाविद्यालय, नागपुर


सिद्धा
सिद्ध प्रणाली भारत में दवा की सबसे पुरानी प्रणालियों में से एक है। इसका मूल तमिलनाडु से हैं | बैचलर ऑफ़ सिद्धा मेडिसिन एंड सर्जरी साढ़े पाँच साल का कोर्स है जिसमे एक साल का इंटर्नशिप मैंडेटरी है| सिद्धा मानव शरीर के सात तत्वों पर फोकस करता हैं ये तत्व मनोवैज्ञानिक और शारीरिक क्रिया को नियंत्रित करती है| जिसमें प्लास्मा ब्लड, मसल , वसा, हड्डी, नर्व और वीर्य शामिल है|

BSMS ग्रेजुएट के बाद स्टूडेंट किसी भी सरकारी हॉस्पिटल और प्राइमरी हेल्थ सेंटर में प्रैक्टिस कर सकतें हैं|

होमियोपैथी
भारत में यह एलोपैथी और आयुर्वेदा के बाद तीसरी सबसे बड़ी मेडिसिन की शाखा है| इस क्षेत्र में साढ़े पांच साल का बैचलर ऑफ़ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BHMS) कोर्स ऑफर किया जाता है जिसमे एक साल का इंटर्नशिप शामिल है| स्टूडेंट्स को इस फील्ड में होलिस्टिक मेडिकल साइंस के बारे में पढ़ाया जाता है जो इस बात पर फोकस करती है की शरीर अपने विकारों को प्राकृतिक रूप से खुद से ठीक करती है|

यह कोर्स स्टूडेंट्स को होम्योपैथिक फार्मेसी, बाल रोग, मनोरोग, त्वचा विशेषज्ञ या बांझपन जैसे किसी भी विशेषज्ञता का चयन करने के लिए ऑफर करता है|BHMS ग्रेजुएट्स फार्मास्यूटिकल कंपनियों में ड्रग फार्मूलेशन और ड्रग सेफ्टी के क्षेत्र में भी काम कर सकतें हैं|

प्रमुख इंस्टीटूट्स

नेहरू होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, दिल्ली
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी, कोलकाता
बक्सन होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, नोएडा
भारतेश होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, बेलगाम, कर्नाटक
C.M.P. होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, मुंबई

यूनानी

बैचलर ऑफ़ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी (B.A.M.S.) यूनानी चिकित्सा के क्षेत्र में भारत में ऑफर की जाने वाली अंडरग्रेजुएट डिग्री है।यह साढ़े पांच साल का डिग्री कोर्स है जिसमे एक साल इंटर्नशिप भी शामिल है|इस कोर्स की पढाई सामान्यतः उर्दू और इंग्लिश में की जाती है|यूनानी प्रणाली में ग्रेजुएशन कोर्स डिस्टेंस एजुकेशन सिस्टम के माध्यम से भी किया जा सकता है।

यह कोर्स ग्रीक फिजिशियन हिप्पोक्रेट्स और गालेन के टीचिंग प्रणाली पर आधारित है | कोर्स कम्पलीट होने के बाद स्टूडेंट यूनानी हाकिम के में प्रैक्टिस कर सकतें हैं|इस क्षेत्र स्पेशलिज़्ड होने के लिए MD या MS 14 डिसिप्लिन में ऑफर किया जाता है|

भारत में सिर्फ 35 मेडिकल कॉलेज हैं जो यूनानी प्रणाली में शैक्षिक कार्यक्रम प्रदान करते हैं। 

प्रमुख इंस्टिट्यूट :

सरकारी निजामीया तिब्बिया कॉलेज, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश
डॉ अब्दुल हक यूनानी मेडिकल कॉलेज, कुर्नूल, आंध्र प्रदेश
आयुर्वेद और यूनानी तिब्बिया कॉलेज (यूनानी), दिल्ली
चिकित्सा संकाय (यूनानी), जामिया हमदर्द, दिल्ली
यूनानी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर

नेचुरोपैथी एंड योगा

इसके अंतर्गत साढ़े चार साल के साथ एक साल का कम्पलसरी इंटर्नशिप बैचलर ऑफ़ नेचुरोपैथी एंड योगा साइंस (B.N.Y.S.) कोर्स ऑफर किया जाता है|आयुष वेबसाइट के मुताबिक़ लगभग 60 मेजर, 100 मध्यम और 90 छोटे लेवल के हॉस्पिटल हैं जो नेचुरोपैथी योगा में इलाज ऑफर करतें हैं|

सोवा-रिग्पा


भारत के हिमालयी क्षेत्र में ‘तिब्बती’ या ‘आमचि’ के नाम से जानी जाने वाली सोवा-रिग्पा विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में से एक है।हालही के कुछ वर्षों में मॉडर्न हॉस्पिटल सिस्टम के कुछ भाग को अडॉप्ट करने के साथ इस क्षेत्र में काफी बदलाव देखने को मिला है|सोवा रिग्पा के चिकित्सक देख कर, छू कर एवं प्रश्न पूछकर इलाज करते हैं।
भारत में इस पद्धति का प्रयोग जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र, लाहौल-स्पीति (हिमाचल प्रदेश), सिक्किम,अरुणाचल प्रदेश तथा दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) में किया जाता है। कॉलेजों के मानक, प्रैक्टिशनर्स के रजिस्ट्रेशन और चिकित्सा पद्धति के तौर-तरीकों को देखते हुए धर्मशाला में सेंट्रल कॉउन्सिल ऑफ़ तिब्बतन मेडिसिन सोवा-रिग्पा को रेगुलेट करती है|इस इस वक्त भारत में सोवा-रिग्पा के 1000 प्रैक्टिशनर्स है|

भारत की सबसे पुरानी मॉडर्न यूनिवर्सिटी कलकत्ता यूनिवर्सिटी
भारत की सबसे पुरानी आधुनिक यूनिवर्सिटी कलकत्ता यूनिवर्सिटी

Copyright © All Rights Reserved.

Subscribe to newsletter