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कुपोषण के साथ-साथ मोटापे से भी जूझता देश

October 1, 2019

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने पहली बार राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण (नेशनल न्यूट्रिशन सर्वे) का आयोजन किया|सर्वे के मुताबिक 5-9 वर्ष के आयु वर्ग के लगभग 10% और 10-19 वर्ष के आयु वर्ग के किशोरों में प्री-डायबिटिक है, जिनमे 5% अधिक वजन वाले हैं और अन्य 5% हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और यूनिसेफ द्वारा फरवरी 2016 और अक्टूबर 2018 के बीच किया गया व्यापक नेशनल न्यूट्रिशन सर्वे कुपोषण को मापने के लिए किया गया पहला अध्ययन है, जिसमें रक्त और मूत्र के नमूनों जैसे जैव रासायनिक उपायों के माध्यम से सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी , साथ ही एंथ्रोपोमेट्रिक डेटा के साथ-साथ बच्चों और किशोरों में , हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और गुर्दे के कार्य जैसे नॉन-कम्युनिकेबल रोगों का विवरण है।

5 से 9 वर्ष के आयु वर्ग के पांच बच्चों में से एक बच्चा अविकसित हैं। सर्वे के मुताबिक तमिलनाडु और गोवा में किशोरों की सबसे अधिक संख्या थी जो मोटे या अधिक वजन वाले थे।

सर्वे में कुल 1.12 लाख बच्चों और किशोरों (0-19 वर्ष) की ऊंचाई और वजन का माप किया गया और 51,029 (1-19 वर्ष) के बच्चों का बायोलॉजिकल सैंपल लिया गया।

वहीं WHO द्वारा तैयार ग्लोबल न्यूट्रिशन रिपोर्ट 2018 के मुताबिक दुनिया में सबसे कमजोर 50.5 मिलियन बच्चों में से, 25.5 मिलियन बच्चे भारत में हैं।भारत दुनिया का तीसरा सबसे अधिक मोटापे वाला देश है।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2018 की बात करें तो 119 देशों की सूची में भारत का 103वां स्थान है|

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