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IITs में एमटेक की 15 से 20 प्रतिशत सीटें रह जातीं हैं खाली

October 11, 2019

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) में एमटेक की हर साल 15-20 प्रतिशत सीटें खाली रह जाती हैं, इंजीनियरिंग ग्रेजुएट एन बी मिश्रा द्वारा दायर सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन की प्रतिक्रिया में यह बात पता चली ।

2018 में, IIT-Delhi में MTech कोर्स में प्रवेश पाने वाले 301 स्टूडेंट्स में से, 74 स्टूडेंट्स ने सीटें खाली छोड़ दीं। वहीं मुंबई और मद्रास के आईआईटी में, खाली सीटों की संख्या क्रमशः 45.01 प्रतिशत और 19.25 प्रतिशत थी।

मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में, ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज में सबसे अधिक आईआईटी-दिल्ली से 782 स्टूडेंट्स ड्रॉपआउट हुए।

वहीं सात पुराने आईआईटी की बात करें तो 2017 में एमटेक पाठ्यक्रमों में 280 रिक्त सीटें थीं, हालांकि 2015 में 669 और 2016 में 639 सीट्स खाली रह गई थी|

देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी (IIT) में MTech कोर्स के तहत कुल 2500 सीट्स हैं|जिसमे GATE स्कोर के जरिये एडमिशन मिलता है साथ ही PSUs में सरकारी नौकरी इसी स्कोर के आधार पर मिलता है|

इसी के आईआईटी ने सर्वसम्मति से एमटेक पाठ्यक्रमों में पढ़ाई छोड़ने के पीछे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) द्वारा असम्बद्ध प्रवेश प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहराया।

सभी पीएसयू और आईआईटी प्रवेश के लिए उच्च ड्रॉपआउट रेसिओ एक कॉमन प्रॉब्लम है क्योंकि सभी का उद्देश्य शीर्ष स्कोरिंग स्टूडेंट्स को पिक करना है। इसका परिणाम यह होता है कि एक स्टूडेंट को कई ऑफर मिल रहे हैं जबकि दूसरे में केवल सीमित या कोई ऑफर नहीं मिल रहा है।चूंकि एक व्यक्ति केवल एक पीएसयू में शामिल हो सकता है|जिसके चलते ड्रॉपआउट की संख्या बढ़ जाती है|

इस मुद्दे से लड़ने के लिए IIT-Madras ने 2017 में एक कॉमन ऑफर एक्सेप्टेंस पोर्टल (COAP) बनाया, जिसके तहत IIT, IISc और सेंट्रल पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (CPSU) को एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर भर्ती करने की उम्मीद थी। हालांकि, केवल भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (NPCIL) ने इस प्रक्रिया में भाग लिया।

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