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UNICEF: दक्षिण एशियाई युवा 21वीं सदी के स्किल्स डिमांड को पूरा करने में सक्षम नहीं

November 8, 2019

दक्षिण एशियाई युवाओं का अनुमानित 54 प्रतिशत अगले दशक में ऑटोमेशन, डिजिटलीकरण के रूप में एक अच्छी नौकरी पाने के आवश्यक स्किल के बिना स्कूल छोड़ देता है, जिसमे कि टेक्नोलॉजी के और भी फॉर्म शामिल है जो लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने में सक्षम है|यह डेटा शिक्षा के लिए ग्लोबल बिज़नेस कोएलिशन फॉर एजुकेशन (GBC- शिक्षा), एजुकेशन कमीशन, और यूनिसेफ द्वारा जेनेरेट किया गया है|

भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में 24 वर्ष से कम आयु के 1.8 बिलियन के लगभग आधी आबादी दक्षिण एशिया में 2040 तक दुनिया की सबसे बड़ी युवा श्रम शक्ति होगी।

NDTV के रिपोर्ट के मुताबिक 21 वीं सदी के काम के लिए आवश्यक स्किल्स वाले युवा लोगों की अगली पीढ़ी तैयार करने में दक्षिण एशिया कई अन्य क्षेत्रों से पीछे है। और यह अनुमान है कि इस मामले में दक्षिण एशिया वैश्विक औसत से काफी नीचे है।

यूनिसेफ के कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा ने कहा, हर दिन लगभग 100,000 दक्षिण एशियाई युवा श्रम बाजार में प्रवेश करते हैं, जिनमें से लगभग आधी आबादी 21 वीं सदी की नौकरियों को खोजने के लिए ट्रैक पर नहीं होते हैं।

वहीं भारत की बात करें तो 2030 तक 47 फीसदी युवा (लगभग 309.6 मिलियन युवा) सेकेंडरी स्कूल कम्पलीट करने और बेसिक स्किल्स सिखने के ट्रैक पर होंगे|

भारत की सबसे पुरानी मॉडर्न यूनिवर्सिटी कलकत्ता यूनिवर्सिटी
भारत की सबसे पुरानी आधुनिक यूनिवर्सिटी कलकत्ता यूनिवर्सिटी

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