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देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले को गूगल ने किया याद,महिला शिक्षा को लेकर किया था बड़ा काम

January 3, 2020

जहाँ चाह वहां राह इस कथन का सबसे बड़ा प्रमाण देश की पहली शिक्षिका सावित्रीबाई फुले हैं|दस साल की नन्ही सी उम्र में जब बच्चे शादी शब्द का मतलब भी सही से नहीं जानते उसी उम्र में उनकी शादी कर दी गई|

दलित परिवार में जन्मी सावित्रीबाई फुले की जब शादी हुई तब वह पढ़ना लिखना नहीं जानती थी|
चूंकि वह दलित समाज से थीं, इसलिए उस वक्त ऊंची जाति के लोगों ने उन्हें पढ़ने ही नहीं दिया। लेकिन पति ज्योतिराव की मदत से उन्होंने प्राइमरी स्तर की पढ़ाई घर पर ही पूरी की|अपने मित्रों की मदत से आगे की पढाई पूरी की|जिसके बाद उन्होंने शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए दो प्रोग्रामों में हिस्सा लिया।

शिक्षिका की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सावित्रीबाई फुले ने पुणे के एक स्कूल में छात्राओं को पढ़ाना शुरू किया| उस दौरान एक शिक्षिका के रूप में समाज ने उनका पूरजोर विरोध भी किया|

आपको बता दें कि ऐसे वक्त में, जब महिलाओं की शिक्षा को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था तब सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं के लिए स्कूल खोला था। सावित्रीबाई फुले, भारत की पहली महिला शिक्षक, कवियत्री, समाजसेविका जिनका लक्ष्य लड़कियों को शिक्षित करना रहा|

पति क्रांतिकारी और समाजसेवी थे, तो सावित्रीबाई ने भी अपना जीवन इसी में लगा दिया और दूसरों की सेवा करनी शुरू कर दी. 10 मार्च 1897 को प्लेग द्वारा ग्रसित मरीज़ों की सेवा करते वक्त वह इस बीमारी से इन्फेक्टेड हो गई जिसके पश्चात सावित्रीबाई फुले का निधन हो गया|

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