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देश में आठवीं तक के स्कूलों में करीब 10 लाख़ टीचर्स की सीटें हैं खाली,इस मामले में उत्तर प्रदेश है अव्वल

February 13, 2020

भारत में सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत को बयां करते ये आकड़े जिसे RTI के जवाब में यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ़ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट द्वारा जारी किया गया|इस रिपोर्ट के मुताबिक़ देश में कक्षा पहली से आठवीं में करीब दस लाख तक टीचर्स के पद खाली है|

2018-19 में शिक्षकों की स्वीकृत, कार्यरत और रिक्तियों की स्थिति के बारे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार – , प्राथमिक शिक्षकों के कुल 10, 22,195 पद (कुल स्वीकृत के 20 प्रतिशत) खाली पड़े हैं। आपको बता दें कि देश में कुल 51,62,569 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 41,40,374 पद भरे जा चुके हैं।

आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में अधिकतम शिक्षण पद खाली होने के मामले में उत्तर प्रदेश 43.9 प्रतिशत खाली पदों के साथ शीर्ष पर है। टीचर्स के खाली पदों के मामले में शीर्ष पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश के अलावां झारखंड, बिहार, दमन और दीव, और हरियाणा का नाम है|जहां हरियाणा में 23.5 फीसदी सीट्स खाली है|

गोवा, ओडिशा और सिक्किम ऐसे राज्य हैं जहां शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों के मुकाबले शिक्षकों के एक भी पद खाली नहीं हैं। वहीं नागालैंड और मिजोरम में भी दो प्रतिशत से भी कम पद खाली हैं।

आंकड़ों से यह भी पता चला कि कुल 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में से केवल एक दर्जन राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं, जिनमें 10 प्रतिशत से कम पद खाली हैं।

उत्तर प्रदेश में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के कुल 8,79,691 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 4,94,114 भरे हुए हैं और 3,85,577 (43.9 फीसदी) पद खाली पड़े हैं|वहीं झारखंड और दमन और दीव 41.7 प्रतिशत और 36 प्रतिशत खाली पदों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
ये आकड़ें हिंदी भाषी क्षेत्रों की हालत कुछ ज्यादा ही ख़राब बयां कर रहे हैं |

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