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आसमान के नीला और सूर्यास्त के वक्त सूर्य के लाल होने के पीछे का क्या है विज्ञान?

March 28, 2020

आसमान नीला क्यों होता है? क्या आसमान की तरफ देखते हुए यह सवाल आपके दिमाक में कभी आया है? सूर्यास्त के वक़्त सूर्य का रंग लाल क्यों प्रतीत होता है? हो सके बहुत लोगों को जवाब नहीं पता हो लेकिन जवाब के पहले मै सवाल की बात कर रहा हूँ|ये सब सवाल किसी भी इंसान चाहे हो वो बच्चे हो या बड़े सबके दिमाक में आना जरूरी है|

अब हम बात करतें हैं इनके पीछे के साइंस की| सूर्य के सफेद प्रकाश में इंद्रधनुष के सभी रंगों के प्रकाश होतें हैं|इन सभी प्रकाश के तरंग दैर्ध्य भिन्न(Wave Length) होतें हैं | जैसे ही वायुमंडल के संपर्क में आतें हैं वायु में उपश्थित गैस के मॉलिक्यूल्स के कारण अलग अलग तरंग दैर्ध्य के प्रकाश वायुमंडल में अलग अलग मात्रा में बिखर जातें है| नीले रंग के प्रकाश के कम तरंगदैर्ध्य के चलते वह वायुमंडल में सबसे अधिक मात्रा में सभी दिशाओं में बिखर (Scatter) जाती है| जिसके चलते हमें आसमान नीला दिखाई देता है|

Horizon

दूसरी तरफ जब हम क्षितिज (Horizon) (जहाँ पृथ्वी और आकाश अलग होते हैं) की तरफ देखतें हैं तो वह हमें आसमान हल्के नीले रंग का दिखाई देता है वह इसलिए प्रकाश को आसमान से इतने निचे से होकर आँखों तक पहुंचने में ऊपर से प्रकाश के पहुंचने की तुलना में अधिक वायु से संपर्क करना होता है और वह कई बार वायुमंडल में सभी दिशाओं में बिखरने लगतें हैं |साथ ही पृथ्वी भी प्रकाश को परावर्तित (Reflect) और स्कैटर भी करती है| और ये सभी रंग के प्रकाश आपस में मिलकर अधिक सफेद और कम नीले की तरफ बढ़ जातें हैं|

सूर्योदय के समय सूर्य का रंग लाल प्रतीत होता है क्योंकि सूर्योदय के समय सूर्य क्षितिज पर होता है पृथ्वी से दूरी अधिक होने से नीले प्रकाश का प्रकीर्णन अधिक और कम तरंग दैर्ध्य होने के कारण वह कई बार सभी दिशाओं में बिखरती है और लाल और पिले रंग के प्रकाश का प्रकीर्णन कम होने के कारण वह अधिक दूरी चलकर आँखों तक पहुंच जाती है जिसके चलते सूर्य रक्ताभ (लाल रंग) प्रतीत होता है।

रक्ताभ

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