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कोरोना वायरस: कुछ सामान्य जानकारियाँ

April 4, 2020

कोरोना(Corona) मूलतः लैटिन ऑरिजिन का शब्द है,जिसका अर्थ होता है क्राउन(Crown) या फिर सूर्य के चारों तरफ बनने वाले प्रकाश का आभा मण्डल जो हमे अमावस्या को साफ दिखता है|

जाहीर है कोरोना के आकार के तरह दिखने वाले वे तमाम सारे वायरस जो इंसानों व जानवरों से लेकर पक्षियों को इन्फेक्ट करते हैं कोरोना वायरस के समूह मे आते हैं|

SARS और MERS जैसे वायरस तो कोरोना वायरस हैं ही, आम तौर पर इंसानों को होने वाले सर्दी-जुखाम और फ्लू का वायरस भी कोरोना वायरस है|

दरअसल जब यह नया कोरोना वायरस पिछले साल दिसंबर में पहली बार चीन में आया तो वैज्ञानिकों ने इसके बारे में जानकारी इकठ्ठा करना शुरू कर दिया| शुरुआत में इसे नाम दिया गया नोवेल कोरोना(मतलब नया कोरोना) और यहीं से कोरोना नाम की दहशत पूरी दुनिया में फैलिनी शुरू हो गई|

आज भी दुनिया के तमाम मीडिया की खबरों में इसे कोरोना के नाम से ही जाना जाता है|

इस वायरस का नाम है Severe acute respiratory syndrome- Corona Virus 2 (SARS-Cov2). इससे होने वाली बीमारी को नाम दिया गया COVID-19.

आखिर यह वायरस है क्या?

जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार यह कोई जीवाणु (कोई जीवित चीज) नहीं यह प्रोटीन का एक मोलेक्यूल है जिसके चारों तरफ वसा की एक पतली परत है| यह मोलेक्यूल क्षणभंगुर है मतलब एक समय के बाद खुद ही नष्ट हो जाता है|

खासतें या छिकतें वक़्त संक्रमित व्यक्ति के मुंह और नाक से निकलकर ये ड्रॉप-लेट्स के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुच जाता हैं या फिर सतह पर छिटक जाता हैं| हवा मे ये वायरस बहुत देर तक नहीं टिकता है|

स्टील और प्लास्टिक जैसी ठोस सतहों पर यह वायरस दो से तीन दिन तक टिक सकता है| लेकिन कापर की सतह पर यह केवल चार घंटे टिकता है|

हमारे कपड़ों और मुलायम सतहों पर यह वायरस कुछ ही घंटों में खत्म हो जाता है|

कैसे करें बचाव

Social Distancing (एक दूसरे से 6 फिट की दूरी बनाए रखकर) व बार-बार साबुन से हाथ धोना ही इस वायरस से बचाव का एक मात्र तरीका है|

साबुन से हाथ धोने से इस मोलेक्यूल के ऊपर की वसा की परत टूट जाती है और यह मोलेक्यूल टूटकर बह जाता है|

जहां पानी की उपलब्धता कम हो वहाँ हम Sanitizer का इस्तेमाल कर सकतें हैं|

कोई भी sanitizer जिसमें 65 फीसदी से ज्यादा अल्कोहल हो उसे हाथ में रगड़ने से वायरस के मोलेक्यूल टूटकर खत्म हो जातें है|

कोई भी दारू या शराब Sanitizer का काम नहीं करती| क्योंकि किसी भी शराब में इतनी मात्रा में अल्कोहल नहीं होता|

दशमलव 5 फीसदी hydrogen peroxide वाले घरेलू ब्लीच से पोछने से किसी भी सतह या फर्स पर पड़े मोलेक्यूल एक मिनट में खत्म हो जाते हैं |

COVID-19 के लक्षण

बुखार, सूखी खासी और सांस लेने में तकलीफ

इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति में यह लक्षण दिखने में दो से चौदह दिन का समय लग जाता है| यही कारण है कि इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति पहचान में आने से पहले ही कई दूसरे लोगों को संक्रमित कर चुका होता है| यही इस वायरस से लड़ाई में सबसे बड़ी चुनौती है|

कुछ बच्चों और यूवाओं में संक्रमण के बावजूद भी बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखतें है| अभी तक वैज्ञानिकों में साफ समझ नहीं बन पाई है क्या ऐसे लोग दूसरों को संक्रमित करतें हैं कि नहीं| ऐसे लोग आम तौर पर संक्रमित व्यक्तियों के आकड़ें मे भी नहीं आ पाते|

कैसे होता है इलाज?

इस वायरस से संक्रमित होने वाले 80 फीसदी लोगों में कुछ सामान्य लक्षण ही दिखतें हैं| जिन्हे घर पर आइसलेट रखकर इलाज किया जा सकता है| महज 20 फीसदी संक्रमित लोगों मे ही तीव्र लक्षण दिखाई पड़ते हैं और उन्हे अस्पताल में ऐड्मिट कराने की जरूरत पड़ती है| और उन्मे से ही लगभग 6 फीसदी लोगों को क्रिटिकल केयर या ICU की जरूरत पड़ती है|

किसको है ज्यादा खतरा?

बच्चों से लेकर बूढ़ों तक कोई भी हो सकता है इस वायरस का शिकार, लेकिन बुजुर्गों के लिए यह वायरस ज्यादा खतरनाक है|

एक आकड़े के मुताबिक हॉस्पिटलाइज होने वालों में 50 फीसदी लोगों की उम्र  55 साल से ज्यादा है और क्रिटिकल कन्डिशन में पाए जाने वालों में 80 फीसदी लोग 65 साल से ज्यादा उम्र के हैं|

पहले से हाइपर टेंशन, हार्ट, डाइबटीज और किड्नी जैसी बीमारी से जूझ रहे लोगों लिए यह बीमारी और ज्यादा घातक हो सकती है| यही कारण है कि डबल्यूएचओ ने इन बीमारियों से ग्रसित लोगों को विशेष केयर लेने की हिदायत दी है|

आखिर कितना घातक है यह वायरस

धारणा है कि तेजी से फैलने वाले वायरस से होने वाली मृत्यु की दर (Mortality Rate) कम होती है, लेकिन कोरोना वायरस न सिर्फ तेजी से फैल रहा है बल्कि इससे होने वाली मृत्यु दर का आकड़ा 2 से 4 फीसदी के बीच हैं|

अगर हम आज तक के आकड़ें पर नजर डालें तो एक तरफ दुनियभर में 11 लाख से अधिक लोग संक्रमित हो चूकें हैं वहीं इस वायरस से मरने वालों की संख्या 60 हजार के पार हो चुकी है|

इस तरह से देखें तो Mortality Rate 5% को पार कर जाती है| लेकिन जानकारों का मानना है दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो बगैर किसी जांच या इलाज के खुद ही ठीक हो जातें हैं और किसी आकड़ों का हिस्सा नहीं बन पाते|

अगर इन्हे भी आकड़ों में शामिल किया जाए तो कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या और बढ़ जाएगी| और मृत्यु दर काफी नीचे आ जाएगी|

महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के लिए यह वायरस ज्यादा घातक है

चीन में 44 हजार कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों पर किए गए शोध में यह पाया गया कि पुरुषों मे मृत्यु दर 2.8 फीसदी थी और महिलाओं में यह आकड़ा 1.6 फीसदी था| यहाँ तक कि इटली में कोरोना संक्रमण से मरने वाले 70 फीसदी लोग पुरुष ही थे|

लेकिन इसके कारणों को लेकर के अभी भी कोई खास समझ नहीं बन पाई है| कुछ लोगों का मानना है पुरुषों में धूम्रपान की लत इसका बड़ा कारण हो सकता है| और कुछ स्त्रियों में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता पुरुषों से ज्यादा होने को इसका आधार मानते हैं|

डबल्यूएचओ का भी मानना है कि कोरोना वायरस की शुरुआत चमगादड़ों से हुई है|लेकिन चमगादड़ से मनुष्य तक पहुचने के बीच और कोई जीव है और अब तक उस जीव की पहचान नहीं हो पाई है|

साफ है कोरोना को लेकर एक तरफ जहां तमाम जानकारियाँ आ रहीं हैं वहीं और भी बहुत सारी जानकारियाँ आनी बाकी है|

आज ना सिर्फ हम देशवासी एकजूट होकर बल्की सारी मानवता कोरोना के खिलाफ जंग में एक साथ खड़ी है| नए शोध हो रहे हैं, दवाइयों के ट्रायल हो रहे हैं और वैक्सीन खोजने में वैज्ञानिक लगे हुए हैं| तय हैं कि मानवता कोरोना के खिलाफ यह जंग जीत जाएगी, सिर्फ समय का इंतजार है|

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