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तीन हफ्तों में 90% मजदूर हुए बेकाम, 94 % मुआवजे के लिए सरकारी मानकों को पूरा नहीं करते

April 11, 2020

देश में कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए 21 दिन के लॉकडाउन से गरीब और मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है| एक गैर सरकारी संगठन (NGO) जन साहस द्वारा कराये गए हालिया सर्वे के मुताबिक 21 दिन के लॉकडाउन के दौरान देश के 90 फीसदी मजदूर अपनी आजीविका का साधन खो चुके हैं|

दरअसल केंद्र सरकार ने निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों को मुआवजा देने को कहा है जिन्होंने
लॉकडाउन के चलते अपनी नौकरियां गवां दी|

गौर करने की बात यह कि निर्माण क्षेत्र से जुड़े 3196 श्रमिकों पर कराये गए सर्वे में यह पता चला कि 94 फीसदी मजदूरों के पास सरकार द्वारा दिए गए मुआवजे का लाभ उठाने के लिए जरूरी भवन और निर्माण श्रमिक प्रमाण पत्र ही नहीं है| ऐसे में जरुरत मंद लोगों तक इस मुआवजे का पहुँचाना आसान नहीं होगा|

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक सर्वे से पता चला कि 5.5 करोड़ मजदूर निर्माण कार्य से जुड़े हुए हैं, जिसमे कि 5.1 करोड़ मजदूर इस सरकारी सहायता से वंचित रह जाएंगे|

सर्वे में शामिल 17 फीसदी मजदूरों के पास बैंक अकाउंट नहीं है जिसके चलते उन्हें मुआवजे का लाभ मिलने में मुश्किल हो सकती है|

सर्वे के मुताबिक 62 फीसदी मजदूरों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि सरकार की इस आपातकालीन राहत उपाय तक पंहुचा कैसे जाय|

सर्वे में शामिल मजदूरों में 42 फीसदी मजदूरों ने कहा कि उनके पास दिनभर का राशन भी नहीं बचा है| जबकि 33 फीसदी मजदूरों का कहना है कि उनके पास राशन खरीदने के पैसे तक नहीं है|वहीं 14 फीसदी ने कहा कि उनके पास राशन कार्ड नहीं है,और 12 फीसदी ने बताया कि वह राशन इसलिए नहीं ले सकते क्योंकि मौजूदा स्थिति में वे वहां उपश्थित नहीं थे |

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