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COVID-19 लॉकडाउन की वजह से 67 फीसदी वर्कर्स हुए बेरोजगार: Survey

May 12, 2020

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के एक सर्वेक्षण के अनुसार, दो-तिहाई श्रमिकों या 67% कर्मचारियों ने COVID -19 लॉकडाउन के चलते अपनी नौकरी गवां दी है।

10 सिविल सोसाइटी आर्गेनाईजेशन के सहयोग से अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी ने 12 राज्यों पर सर्वे किया|जिनमे आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (पुणे), ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य शामिल हैं।

सर्वेक्षण सेल्फ एम्प्लॉयड, कैज़ुअल और रेगुलर वेज/सैलरी वर्कर को कवर करता है|जिनके लॉकडाउन लागू होने के बाद से रोजगार और कमाई के स्तर को मापा गया,और उनकी तुलना फरवरी माह की स्थिति से की गई।

यूनिवर्सिटी ने एक बयान में कहा, रोजगार, आजीविका, और सरकारी राहत योजनाओं तक पहुंच पर COVID19 लॉकडाउन के प्रभाव का आकलन करने के लिए 4,000 श्रमिकों का फोन सर्वेक्षण किया गया, जिसके मुताबिक शहरी भारत अधिक गंभीर रूप से प्रभावित है।

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी का यह सर्वे रिपोर्ट कुछ हफ़्तों पहले जारी की गई थी जिसके मुताबिक :-

कैजुअल वर्कर्स के लिए जो अभी भी कार्यरत थे, लॉकडाउन के दौरान उनकी औसत साप्ताहिक कमाई फरवरी में 940 रुपये से लगभग आधी (495 रुपये) हो गई है।

शहरी क्षेत्रों में 10 वर्कर्स में से आठ (80 प्रतिशत) और ग्रामीण क्षेत्रों में दस वर्कर्स में से लगभग छह (57 प्रतिशत) अपना रोजगार खो चुके हैं|

नॉन- एग्रीकल्चर सेल्फ एम्प्लॉयड वर्कर्स के लिए जो अभी भी कार्यरत थे उनकी औसत साप्ताहिक आय 2,240 रुपये से गिरकर 218 (90% की गिरावट) हो गई।

सभी वेतनभोगी (salaried) वर्कर्स में से 51 फीसदी ने या तो अपने वेतन में कमी देखी या उन्होंने कोई वेतन प्राप्त नहीं किया।

लगभग आधे (49 प्रतिशत) घरों में एक सप्ताह के लिए आवश्यक वस्तुओं को खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे|

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