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विश्व मधुमक्खी दिवस मनाये जाने का क्या है कारण? साल का थीम है “Save the Bees”

May 20, 2020

हर साल संयुक्त राष्ट्र द्वारा 20 मई को विश्व मधुमक्खी दिवस के रूप में मनाया जाता है।2018 से आधिकारिक रूप से यह दिवस मनाया जाता आ रहा है|इस अंतर्राष्ट्रीय दिवस का उद्देश्य इकोसिस्टम के लिए मधुमक्खियों और अन्य परागणकों की भूमिका से लोगों को जागरूक कराना है|इसी दिन, आधुनिक मधुमक्खी पालन की तकनीक का नेतृत्व करने वाले एंटोन जनसा (Anton Jansa) का जन्म 1734 में हुआ था।

इस वर्ष विश्व मधुमक्खी दिवस मधुमक्खी बचाओ (Save the Bees) थीम के तहत मनाया जाएगा|

साथ ही इस दिन के उपलक्ष में मधुमक्खी पालन और बाग़बानी के उत्पादों जैसे-शहद, रायल जैली, बी-पोलेन, प्रपोलिस और बी-वैक्स आदि के बारे में लोगों को विस्तार से जानकारी दी जाती है। 

मधुमक्खियाँ सबसे बड़ी पोलिनेटर्स होती हैं।संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगभग 35% विश्व कृषि अभी भी परागणकों (पोलिनेटर्स) पर निर्भर है।लेकिन वर्तमान में वे पैरासाइट, बीमारियों और कृषि कीटनाशकों के कारण बहुत खतरे में हैं।

TOI की ख़बर के मुताबिक भारत में मधुमक्खीपालन से प्राप्त होने वाले उत्पादों का कारोबार औसतन 2,000 से 2,500 करोड़ रुपये का होता है जिसमें लगभग 1,000 करोड़ रुपये के मधुमक्खीपालन से प्राप्त उत्पादों का निर्यात होता है। निर्यात का लगभग 80 से 90 प्रतिशत निर्यात अमेरिका को किया जाता है जबकि शेष निर्यात पश्चिम एशिया, यूरोपीय देश और अफ्रीकी देशों को होता है।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार बादाम, सेब, ब्लूबेरी, खीरे, कद्दू, स्ट्रॉबेरी और प्याज सभी मधुमक्खियों द्वारा परागित होती हैं।

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