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पीरियाडिक लेबर फ़ोर्स सर्वे: भारत में स्व-रोजगार करने वाले परिवारों में आई कमी

June 9, 2020

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा हाल ही में जारी किए गए पीरियाडिक लेबर फ़ोर्स सर्वे के अनुसार, ग्रामीण भारत में स्व-रोजगार वाले परिवारों का प्रतिशत वित्तीय वर्ष 2018 में 52.2% से घट कर वित्तीय वर्ष 2019 में 51.2% तक हो गया है। जबकि शहरी भारत में, इसी अवधि के दौरान यह आकड़ा 32.4% से घटकर 31.8% हो गया।

ग्रामीण भारत में यह गिरावट कृषि पर निर्भर परिवारों में गिरावट के कारण है, जो कि वित्त वर्ष 2018 में 37.8% से घटकर वित्त वर्ष 2019 में 36.6% हो गई, जबकि इसी अवधि के दौरान गैर-कृषि गतिविधियों में स्व-रोजगार 14.3% से बढ़कर 15.1% हो गया।

सर्वेक्षण के मुताबिक शहरी भारत में, छोटी दुकानें चलाने वाले लोग मजदूर बन गए। जबकि ग्रामीण क्षेत्र में, गैर-कृषि कैजुअल लेबर वित्त वर्ष 2018 में 12.9% से बढ़कर वित्त वर्ष 2019 में 13.4% हो गया, वहीं शहरी भारत में, कैजुअल लेबर पर निर्भर परिवार इसी अवधि के दौरान 11.8% से घटकर 11% हो गए।

वहीं जब नियमित वेतन पाने वालों की बात आती है, तो यह ग्रामीण (13.1%) और शहरी भारत (42.8%) दोनों में वित्त वर्ष-19 में क्रमशः 0.4 प्रतिशत और 1.4 प्रतिशत की वृद्धि अर्थव्यवस्था को और फॉर्मलाइज़्ड होने की तरफ दर्शाती है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष कहते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था अधिक फॉर्मलाइज़्ड हो रही है। भारत सरकार पिछले 5 से 6 वर्षों में फॉर्मलाइजेशन और डिजिटलीकरण की तरफ कोशिश कर रही है।

भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद् प्रोनब सेन ने कहा कि यह स्वरोजगार के क्षेत्र में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कमी है, विशेष रूप से शहरी भारत में, यह सुझाव देते हुए कि छोटे व्यवसाय जैसे कि छोटी दुकानों को चलाने वाले लोग उसे बंद कर लेबर बनने की तरफ रुख कर लिए।

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