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मर्चेंट नेवी बन सकता है अच्छी कमाई का जरिया

May 15, 2019

मर्चेंट नेवी किसी भी नौजवान के लिए एक बेहद रोमांचक और अच्छी कमाई का विकल्प है, जिसमे ऑफिस की तरह कार्य करने की समय सीमा भी नहीं है| बहुत कम उम्र में ही इस करियर में लोग एक अच्छा मुकाम तथा भारी पगार पा लेते हैं, जोकि उनके साथियों को अन्य नौकरियों में या तो प्राप्त नहीं होती, या तो बहुत उम्र जाने पर हासिल होती है| बहरहाल हम सबसे पहले जान लें कि आखिर मर्चेंट नेवी है क्या? पानी के जहाजों की यह वो दुनिया है, जिसका प्रमुख कार्य सामान/ मॉल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुचाना है| यह विश्व अर्थव्यवस्था का एक बेहद अहम हिस्सा है,क्योकि दुनिया भर में नब्बे फीसदी से अधिक माल पानी के जहाजों के जरिये पहुचाया जाता है| इसके अलावां कुछ यात्री वाहक पानी के जहाज भी होते हैं, जिनमे लोग एक स्थान से दूसरे स्थान सफर करते हैं|  वैसे तो करियर बड़ा ही चुनौती पूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र में आपको छः से सात महीनों तक घर से दूर समुन्दर के बीच रहना होता है|

जॉब प्रोफाइल

मर्चेंट नेवी का पूरा कामकाज डेक, इंजन और सर्विस डिपार्टमेंट के रूप में तीन हिस्सों में बंटा है। डेक विंग में कैप्टन, चीफ ऑफिसर, थर्ड ऑफिसर और जूनियर ऑफिसर जैसे प्रोफेशनल्स अपनी सेवाएं देते हैं। इसी तरह इंजन डिपार्टमेंट में चीफ इंजीनियर, सेकंड इंजीनियर, थर्ड इंजीनियर, फोर्थ इंजीनियर, इलेक्ट्रिकल ऑफिसर और जूनियर इंजीनियर्स जैसे प्रोफेशनल्स की सेवाएं शामिल हैं। मर्चेंट नेवी के सर्विस डिपार्टमेंट के तहत शिप पर स्टूअर्ड, गोताखोर, लाइट कीपर, नर्स, नॉटिकल सर्वेयर आदि जैसे प्रोफेशनल किचन, लॉण्ड्री तथा यात्री सेवाएं उपलब्‍ध कराते हैं।

शिपिंग की इस दुनिया में या मर्चेंट नेवी के तहत यूं तो कई प्रकार के रोजगार छोटे बड़े स्तर पर उपलब्ध रहते हैं, परन्तु दो करियर विज्ञान और इंजीनियरिंग के छात्रों हेतु सर्वश्रेष्ठ हैं, वो है- Navigating Officers या Deck Officer तथा Marine Engineers

Navigating Officers या Deck Officer

एक डेक अधिकारी विभिन्न प्रकार कार्यों को अमल में लाने काम करता है- जैसे कि नेविगेशन, जहाज का संचालन , बोर्ड पर सभी सुरक्षा उपकरणों को संभालना, कार्गो, संचार और सुरक्षा ।

Navigating Officers या Deck Officer बनने के लिए या तो अभ्यर्थी को विज्ञान में बारहवीं पास होना होगा, वो भी PCM में 60 प्रतिशत अंक लेकर या फिर B.Sc. पास,फिजिक्स, मैथमेटिक्स,कमिस्ट्री या इलेक्ट्रॉनिक्स में से कोई एक विषय के साथ | दोनों ही के लिए अंगरेजी विषय में 50% बाहरवीं में होना भी अनिवार्य है| साथ ही शारीरिक और स्वास्थ के हिसाब से भी पूरी तरह से योग्य होना जरूरी होता है|बारहवीं के लिए उम्र सीमा 22 से कम तथा ग्रेजुएट के लिए 25 से कम रखी गयी है|जो लोग यह योग्यता रखते हैं वे सीधे शिपिंग कम्पनीज में Deck Cadets के लिए आवेदन कर सकते हैं|अमूमन ये कंपनियां मई-जून , तथा नवम्बर/ दिसम्बर में प्रत्याशियों का चयन करती हैं| चयन होने पर अभ्यर्थी को 1 वर्ष की Pre-Sea training करनी होती है, जिसका खर्च 2 से 3 लाख आता है, जिसे प्रत्याशी को ही वहन करना पड़ता है|इस ट्रेनिंग के सफलता पूर्वक ख़त्म करने के बाद कैडेट को 18 महीने समुद्री जहाज़ों में रखके प्रशिक्षण दिया जाता है, जिस दौरान 15000 रु महीने तक स्तिपेंट भी मिलता है| इस तमाम प्रक्रिया से गुजरकर कैडेट अपनी आख़िरी परीक्षा के लिए तैयार होता है, जोकि भारत सरकार के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग द्वारा आयोजित होता है| इसे पास कर लेने पर प्रत्याशी किसी भी जहाज में 3rd ऑफिसर नियूक्त हो जाता है| इसके दौरान भी बीच-बीच में उसे कुछ योग्यता परीक्षा उत्तीर्ण करनी पड़ती है|

Marine Engineer:

जहाज और उसके इंजन के रखरखाव में मरीन इंजीनियरिंग की अहम् भूमिका होती है | कई बार प्रोफेशनल्स को मरीन सर्वेयर की भूमिका भी निभानी पड़ती है, जिसके अंतर्गत जहाजों का परीक्षण, ऑफशोर इंस्टॉलेशन और सेफ्टी उपायों का अध्ययन आदि करना होता है।

Marine Engineer से करियर शुरू करने के लिए प्रत्याशी को मैकेनिकल इंजीनियरिंग/ मरीन इंजीनियरिंग में 60 प्रतिशत अंको के साथ पास होना अनिवार्य है| इसके अलावा बारहवीं में 50 प्रतिशत के साथ अंग्रेजी में भी पास होना जरूरी होता है| शारीरिक और स्वास्थ्य के मापदंडों में भी योग्य होना चाहिए| जो अभ्यार्थी ये योग्यता रखते हैं , वे शिपिंग कम्पनीज़ को ट्रेनी मरीन इंजिनियर हेतु आवेदन कर सकते हैं|चयन होने पर प्रत्याशी को एक वर्ष की प्री-सी ट्रेनिंग के लिए Maritime Training Institute जाना पड़ता है, जिसकी फीस दो से तीन लाख होती है, जो कि उसे ही वहन करना पड़ता है| ये ट्रेनिंग ख़त्म करने के बाद ट्रेनी इंजिनियर को छह महीने जहाज पर रहके Apprenticeship करनी पड़ती है| जिसके पश्चात उसे भारत सरकार के डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग की परीक्षा देनी पड़ती है|इस परीक्षा में उत्तीर्ण होके ट्रेनी मरीन इंजिनियर किसी भी जहाज में 4th इंजिनियर के तौर पे नौकरी पा लेता है| समय के साथ कुछ और योग्यता परीक्षायें पास करते हुए वह चीफ इंजिनियर के पद तक पहुच जाता है| इसमें अक्सर 11 साल का समय किसी को भी लगता है|

मर्चेंट नेवी में करियर चुनने के वक्त एक ख़ास बात का ध्यान हर किसी को रखना चाहिए, वो है कंपनी का चयन बहुत ही सोच समझकर, जाच परख कर कंपनी चुनिए| कंपनियों की पृष्ठभूमि , उनका व्यवसाय, उनका जहाज़ों का बेडा हर एक चीज की जानकारी लीजिये| जितना बड़ा जहाज का बेड़ा होगा , और जितनी अधिक मंजिलों के जहाज होंगे वे बेहतर रहेगा, क्योंकि उसमे आपको अधिक तजुर्बा और अधिक विविधता प्राप्त होगी, तथा तरक्की में सहायता मिलेगी|

कोर्सेस:

चार वर्षीय बी.ई.बी. टेक मरीन इंजीनियरिंग
दो वर्षीय एम ई मरीन इंजीनियरिंग

प्रमुख संश्थान

इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, मुंबई

इंटरनेशनल मैरीटाइम इंस्टीट्यूट, दिल्ली

इंडियन मेरीटाइम यूनिवर्सिटी, चेन्नई

कोच्चि यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी

मरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, कोलकाता

एएमईटी यूनिवर्सिटी, तमिलनाडु

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, मद्रास

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पोर्ट मैनेजमैंट, कोलकाता

भारत की सबसे पुरानी मॉडर्न यूनिवर्सिटी कलकत्ता यूनिवर्सिटी
भारत की सबसे पुरानी आधुनिक यूनिवर्सिटी कलकत्ता यूनिवर्सिटी

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